आत्मनिर्भर भारत मिशन

आत्मनिर्भर भारत क्या है आत्म निर्भर का साधारण तह अर्थ है स्वयं के पैरों पर खड़ा होना. दूसरों पर आश्रित नहीं रहना. जैसे कोई सामान मशीनरी भारत में बनाओ, भारत का ही सामान खरीदो और भारत के सामान का दूसरे देशों...

शनि जयंती क्या है?

शनि महाराज जी की जयंती हिन्दू पंचाग के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को बड़ी श्रद्धा और उनकी अराधना करके मनाई जाती है। इस दिन शनि महाराज की पूजा अर्चना एवं तेल से अभिषेक किया जाता है। यह दिन शनि दोष...

सुन्दरकांड क्या है और इसे कैसे पढ़ना चाहिए ?

सुन्दर कांड वाल्मीकि जी द्वारा रचित एक धार्मिक ग्रन्थ का हिस्सा है। जो संस्कृत भाषा में वर्णित किया गया है। तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में राम चरित्र मानस की रचना की है। वैसे रामायण कयी भाषाओं में लिखी गयी है।...

रामायण जी की आरती

आरती श्री रामायण जी की, किरती कलित ललित सिय पी की। गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद, वाल्मीकि विज्ञान विशारद, सुक सनकादि शेष अरु शारद, बरनि पवनसुत किरति निकी। आरती श्री रामायण… गावत वेद पुराण अष्ट दस, छओं शास्त्र सब ग्रंथ को रस,...

गंगा जी की आरती

ऊँ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता, जो जन तुमको ध्याता,मनवांक्षित फल पाता। ऊँ जय गंगे… चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता, शरण पड़े जो तेरी, सो जन तर जाता। ऊँ जय गंगे… पुत्र सगर के तारे, सब जग...

लक्ष्मी जी की आरती

ऊँ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता, तुमको निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता। ऊँ जय लक्ष्मी माता… उमा रमा ब्रह्माणी, तुम्ही हो जग माता, सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ॠषि गाता, ऊँ जय लक्ष्मी माता… दुर्गा रुप निरंजनि, सुख संपत्ति दाता।...

महाकाली जी की आरती

अंबे तु है जगदंबे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती। तेरे भक्त जनोपर माता भीर पड़ी है भारी, दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी। सौ सौ सिंहों...

दुर्गा जी की आरती

जय अंबे गौरी मैया जय श्यामा गौरी, तुमको निश दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी। ऊँ जय अंबे गौरी… मांग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को, उज्ज्वल से दौ नैना चन्द्रवदन नीको। ऊँ जय अंबे गौरी… कनक समान कलेवर रक्तांबर राजे, रक्त...

श्री राम जन्म स्तुति

।।छंद।। भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी, हरषित महतारी, मुनि मन हारी अद्भुत रूप विचारी। लोचन अभिरामा तनु घनश्यामा, निज आयुध भुजचारी, भूषण वनमाला नयन विशाला सोभा सिन्धु खरारी। कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करूं अनंता, माया गुन...

श्री राम जी की स्तुति

।। छंद ।। श्रीराम चन्द्र कृपालु भजमन, हरण भवभय दारुणम्। नव कंजलोचन कंज मुखकर, कंज पद कंजारूणम्। कंदर्प अगनित अमित छवि नव, नील निरज सुन्दरम्। पट्पीत मानहुं तडित रुचि शुचि, नौमी जनक सुतावरम्। भजु दीनबंधु दिनेश दानव, दैत्य वंश निकंदनम्। रघुनंद...